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Thursday, April 23, 2009

कालसर्प योग का भूत

काल सर्प योग -एक एसा योग है जो यदि कुंडली में निकल आए तो होश जाते रहते है /
मैंने तो यहाँ तक देखा है की योग ना भी रहने पर ज्योत्षी योग बता देते है क्यों की यह अच्छी कमाई का साधन है /काल सर्प योग पूर्णतया नई खोज है पुराने ज्योतिष पुस्तकों में इसका अस्तित्व नही मिलता /जैसा बताया जाता है यह कुल ८५ किस्म का है जब की कुछ इसे 6th किस्म का ही मानते है /काल सर्प पर अदा मीर की पुस्तक दी बुक ऑफ़ दी नोड्स और मोहन कोपरकर की लूनर नोड्स ,जोर्ज व्हाघ्त की दी मून नोड्स एंड देयर इम्पोर्टेंस इन नेटल यस्त्रो लोजी जैसे विश्व स्तर्य आधुनिक ज्योतिषियों ने अपनी पुस्तको में राहू केतु को लेकर जो आधुनिक विचार लिखे है वो भी काल सर्प योग की पुष्टि नही करते / मेरा प्रश्न बड़ा सीधा सा है यदि यह योग घातक है तो सभी के लिए होना चाहिए ना की दो दो माप दंड लिए हो यानी सचिन तेदुलकर की कुंडली में है तो फायदामंद है और वही किसी गरीब की कुंडली में है तो घातक है / मुसोलिनी जैसा निरंकुश शासक का जन्म एस योग में था /अल्बानिया का सम्राट ०८-०४-१९३९ को इसी में जन्मा /प्रथम वर्ल्ड वार के समय १९१७ में यही योग था /और तो और भारत की कुंडली में भी यह योग है / यह तो साफ़ है की यह योग घातक है तो सचिन की कुंडली में अनेक नीच ग्रहों के साथ होने के बावजूद यह योग शांत क्यो है /कैसे सचिन इतनी बुलंदी पर पहुच गया /अय्से विकट प्रश्न का जवाब खूब दिया जाता है की कोई एक ग्रह योग से बाहर चला गया है इस लिए योग भंग होगया /परन्तु अंशो में जाँचा जाए तो सच कुछ और ही मिलता है की वह ग्रह राहू केतु से अंशो में पीछे ही था / क्रिशन मूर्ति पद्धति काल सर्प योग नही मानती / इसके अनुसार भविष्य स्थिर है अन्तर दशा केवल स्थिर भविष्य को प्रकट करती चलती है /जैसे आपने बैंक में धन जमा कर रखा है तो आप समय अनुसार स्थिर परे धन को निकाल सकते हो अन्यथा नही / यदि भविष्य अस्थिर होता तो यानी परिवर्तन शील होता तो सब कठिन होजाता /दूसरी बात यह है की यदि काल सर्प योग का प्रमुख आधार राहू केतु है तो इनकी दशा बुरी होनी चाहिए जबकि योग रहते हुए इनकी दशा में लोग मजे उडाते दिखे /मजा तो और तब बढ़ जाता है जब इसकी शान्ति के नाम पर सर्प की पूजा बताई जाती है /चांदी के नाग नागिन जोड़े में उत्तरायनी नदी में जा कर छोरे जाते है /यह अत्यन्त कष्ट पूर्ण स्थिति है /ज्योतिष का पतन काल- काल सर्प योग के रूप में चालू हो चुका है यह ख़ुद ज्योतिष को पता नही /

Wednesday, April 15, 2009

कुंडली मिलान का परिणाम

मैं पिछले २५ वर्ष से ज्योतिष की सेवा में लगा हूँ /हजारो कुंडली ऐय्सी देखि होगी जो शादी से पहले पुरे नियम कायदे से मिलान कर के शादी की गई थी परन्तु लड़का लड़की शादी के बाद अलग हो गए जब की २० से ३६ गुन दोनों में मिलते थे / फ़िर एसा क्या हूवा की शादी टूट गयी जब की गुन पुरे मिले थे /असल कहानी पर्दे के पीछे कुछ और ही होती है /यदि मेरी और प्रशिध हिरोईन हेमा मालिनी दोनों के नाम या कुंडलिनी का मिलान किया जाए तो २० से ३६ गुन जरुर मिल जाए गे लेकिन इसका मतलब यह तो नही की मेरी और हेमा जी की शादी में अन्य असमानता मायने नही रखती / दरसल कहना यह है की गुन के बिनाह पर शादी ग़लत है / एक सफल शादी के लिए क्रिशन मूर्ति पद्धति से सभी बातो पर ध्यान देना जरुरी है /जैसे संतान धन शरीर आयु और मिजाज एक जैसे हो तो शादी सफल रहती है /परन्तु इन बातो को कुंडली से सफलता पुर्बक पढ़ पाना पराशर पद्धति के बस में नही केवल क्रिसन मूर्ति पद्धति द्वारा संभव है / जब शादी के बाद कुंडली देख कर ज्योतिष यह बता सकता है की दोनों पति पत्नी सुखी नही है तो उसी कुंडली से शादी क्यो रची गयी /तब क्या कुंडली दूसरी थी /नही सच तो यह है की पद्धति ग़लत थी / पराशर पद्धति विशुद्ध दोषों से भरी है / सभी अपनी अपनी कल्पना बयान करते है जैसे लग्न में गुरु है तो आदमी राजा होगा जबकि आदमी भीख मांगता घूम रहा था / इससे बड़ा मजाक और क्या होगा /जब की क्रिसन मूर्ति पध्दती इतनी ज्यादा शक्तिशाली है की ग्लास पर बेठी मख्खी कब उडे गी यह भी बता सकती है /खैर मतलब यह है की सार रूप से कुंडली क्या बोलती है यह समझ कर ही शादी करनी चाहिए /थेंक्स /

मूल नक्षत्र शान्ति का चक्कर

मूल नक्षत्र शान्ति के नाम पर आजकल ज्योतिषियों की दूकान खूब चमक रही है / दो से चार हजार कमाने बड़ी बात नही है /लेकिन सच अलग ही है /पाँच जो नक्षत्र मूल दोष के वजह है उनके वास पर कोई ध्यान नही देता और फालतू की टेंशन पाल ली जाती है /मुहूर्त चिंता मणि नामक प्रशिध ज्योतिष पुस्तक में साफ़ साफ़ काहा गया है की हिन्दी माह आषद भादों आश्विन माघ इन माह में मूल नक्षत्र का निवास स्वर्ग में और श्रावन कार्तिक चेत्र और पोश महीने में मूल का निवास भूमि पर होता है जब की फागुन ज्येष्ठ अग्रहण और वैशाख महीने में मूल नक्षत्र का निवास पाताल लोक में होता है / इस प्रकार श्रावन कार्तिक चेत्र और पौष महीने जो बच्चा उत्पन्न हो उसी के मूल की शान्ति हो टी है अन्यथा नही / जब की यदि शान्ति अन्या महीनो में पैदा की शान्ति कर दी जाए तो उलटा नुकशान हो जाता है / दूसरी बात यह है की नक्षत्र के चरणों का भी भेद है / सभी चरण अशुभ नही होते / जो इस प्रकार है -अश्वनी का पहला चरण पिता के लिए ख़राब होता है इस लिए शान्ति करे / आस्वलेशा सभी चरण ख़राब होते है /इस लिए शान्ति जरुरी है / मघा के पहले दो चरण ख़राब होते है इस लिए शान्ति जरुरी है /ज्येथा नक्षत्र के भी चारो चरण ख़राब है /मूल नक्षत्र पहले तिन चरण ख़राब है इस लिए शान्ति करे /अंत में रेवती का अन्तिम चरण ख़राब होता है बांकी और नही इस लिए शान्ति करे /उम्मीद है काफ़ी हद तक आप की उलझन दूर हुई हो गी /
प्रतेक नक्षत्र के चार चरण होते है /जो चरण ख़राब बताये है उनके अलावे अन्या चरण की शान्ति जरुरी नही है बल्कि शान्ति कर ने पर उलटा असर हो जाता है /थैंक्स.

Sunday, April 5, 2009

कृष्ण मूर्ति पद्धति में नए वस्त्रो का मह्त्व

आदिम काळ से आदमी कपरो का महत्व समझाता आया है /कपडे इंसान को लज्जित होने से केवल बचाते है बल्कि उसकी इज्जत भी बढाते है / परन्तु नए कपडों का किस मुहूर्त में इस्तेमाल शुरू करना चाहिए इस बात में बहुत भेद छुपे है / एक अच्छे मुहूर्त में पहना हुआ नया वस्त्र हमेशा संतुसटी के साथ कई फायदे फालतू में दिलाती है / विश्व के सर्व उत्तम ज्योतिष पुरोधा पंडित कृष्ण मूर्ति ने इस मामले में अपने अनुभव खूब लिखे है जो मैंने भी सत्य अनुभव में पाए है / मेरा दावा है आप स्वयम भी आजमा कर देखे की किस मुहूर्त में अर्थात किस नक्षत्र में पहनने से क्या क्या लाभ प्राप्त होता है / जिस दिन जो नक्षत्र हो उस के अनुसार शुभ और अशुभ फल प्राप्त होता हए /इस लिए शुभ नक्षत्र में नए कपड़े पहनने चाहिए ताकि अन्य फायदे भी मुफ्त में प्राप्त हो सके / नक्षत्र की सूचि और कपड़े पहनने का फलाफल निम्नांकित हे ------------ ------------------------------[] अश्वनी ---इस नक्षत्र में नए कपडे पहने जाए तो आगामी कुछ समय में और अधिक नए वस्त्र पहनने के लिए प्राप्त होते हे / [] भरनी ---इस नक्षत्र में नए कपडे पहने जाए तो कपड़े चोरी चले जाते हे / [] -कृतिका --ये नक्षत्र बडा जोखिम भरा हे / इस में नए कपडे पहने जाए तो जान का खतरा पैदा हो जाता हे / यदि कुंडली में मारक ग्रह की दशा चल रही हो तो मृत्यु भी संभव हे / [] रोहिणी - इस नक्षत्र में अतरिक्त प्रयास कर के भी नए कपड़े अवश्य पहनने चाहिए क्यों की बैंक बलेंस और मजबूत होता हे /[] मृगशिरा - इस नक्षत्र में यदि नए कपडे पहने जाए तो नए कपड़े चूहों आदि से कपडे नाश हो जाते हे /[] aardra-इस नक्षत्र नए कपडे पहनने पर धन की हानि होती हे / [] punarvasu -इस नक्षत्र में नए कपडे पहने तो और अधिक धन प्राप्त होता हे /[] pushya-इस नक्षत्र में पहनने से सब mangal होता हे [] aslesha -इस में पहने कपडे नाश हो जाते हे [१०] magham-इस नक्षत्र में भी जान का खतरा होता हे [11] poorvafalguni -इस नक्षत्र में पहने से सरकारी बाधा आन पड़ती हे [१२] utrafalguni-इस नक्षत्र में income और health बढ़ जाती हे /[hast] इस नक्षत्र में पहनने से जीवन में सफलता प्राप्त होती हे /[१४] chitra -इस नक्षत्र में नए कपड़े और प्राप्त होते हे /[१५]swati-इस नक्षत्र में पहनने पर उत्तम भोजन प्राप्त होता हे [१६] vishakha-जो विख्यात होना चाहते हे इस नक्षत्र में नए कपडे पहन सकते हे / [१७] anuradha -दोस्ती और समाज में इज्जत चाहने वाले इस नक्षत्र में नए कपडे पहन सकते हे /[१८] jyeshtha-इस धन का नाश होता हे [१९] मूल- इस में पहनने से washerman कपडे नाश कर देता हे /[२०] poorvashadha-इस नक्षत्र में नए कपडे health के लिए हानि देते हे /[२१] utrashadha- इस में पहनने से उत्तम भोजन प्राप्त होता हे [२२] srawan-इस नक्षत्र में पहनने से eye disease होती हे /[२३] dhanishta-इस नक्षत्र में business में फायदा होता हे /[२४] satbhisha -इस नक्षत्र का असर बड़ा ख़राब हे /poison से डर होता हे / [२५] poorvabhadrapad-इस नक्षत्र में जान को पानी से खतरा होता हे / [२६] uttrabhadrapad -जो संतान हीन हे वो n